सारे वादे तुम्हारे
मैंने रख दिया है
दिल की किताब में
सूख चुके हैं
सभी वादे
किताब की फूल की तरह
छूने से डरता हूं
टूट न जाये कहीं.........
डरा हुआ व्यक्ति प्रेम नहीं कर सकता मैं बहुत डरपोक हो गया हूं तुमसे मिलने के बाद तुम्हे जान लेने के बाद ! जबकि जानता हूं मैं डरपोक नहीं हूं...
यादें तो सहेजने की चीज है ....बहुत सार गर्वित ...अन्दर तक छू दिया
ReplyDeleteबहुत खूब. एक दम सही जानते हैं आप . धन्यवाद .
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