Tuesday, November 8, 2011

वादे



सारे वादे तुम्हारे 
मैंने रख दिया है 
दिल की  किताब में 

सूख चुके हैं 
सभी वादे 
किताब की फूल की  तरह 
छूने से डरता हूं 
 टूट न जाये कहीं.........

2 comments:

  1. यादें तो सहेजने की चीज है ....बहुत सार गर्वित ...अन्दर तक छू दिया

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  2. बहुत खूब. एक दम सही जानते हैं आप . धन्यवाद .

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इन्सान नमक हराम होता है!

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