ऐसा नहीं कि
मैं, तुमसे मिलना
नही चाहता अकेले में ,
पर क्या करूँ
हर तरफ भीड़ है बेशुमार
गली का वो कोना
आज ही बिका है
तालाब के किनारे
खड़े हो गए सीमेंट के
जंगल
अब यहाँ पंछियों का
जोड़ा भी
नही आता कभी
मैं नही डरता
लोगों की कानाफुसी
से
बस सहम उठता हूँ कभी
–कभी
खाप पंचायत से
सरकारी जासूसों से
कहीं भर न दे हमें
सलाखों के पीछे
“राजद्रोह “ के आरोप
में ...............
