हम दोनों के
बीच की दूरी
यूँ ही बनी रहे
अपनी सफाई देकर
नही करना चाहता खुद पर संदेह
न ही करना चाहता हूँ
तुम्हे शर्मिंदा ....
बीच की दूरी
यूँ ही बनी रहे
अपनी सफाई देकर
नही करना चाहता खुद पर संदेह
न ही करना चाहता हूँ
तुम्हे शर्मिंदा ....
ज़ार मर गया मर गया हिटलर भी वो भी गया और ये भी जायेगा .. इक़लाब जारी रहेगा .. अमन के आने तक ऐ मेरी अधूरी कविता तुझे पूरा करूँगा इन्कलाब के ...
Lagta hai gahri chot khae hain bhai.
ReplyDelete:)
ReplyDeleteकुछ बातें परदे में ही भली
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