Monday, April 23, 2012

यदि मिला कभी तुमसे ...

यदि मिला कभी तुमसे ....
सुनाऊंगा अपनी कहानी फुर्सत से
....अब तक जो बुना था
ओढ़ कर सोने दो मुझे

7 comments:

  1. फिर कभी होगी कोई बात
    अभी तो खुद से मिलने दो

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  2. क्या बात हैं ......

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    1. शुक्रिया सुनील जी ..स्वागत है मेरे ब्लॉग पर आपका

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  3. .अब तक जो बुना था
    ओढ़ कर सोने दो मुझे
    ....यूँ ही तो सपनों का ताना बाना नहीं बनता
    ..बहुत बढ़िया जज्बात..

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