साथी अब हाथ नही बढाता
साथी अब हाथ खीचता है पीछे
साथी अब जान चुके हैं
बाजारवाद - पूंजीवाद का स्वाद ।
उसे शायद लगा है
मीठा इसका स्वाद
तभी तो ख़ुद को बेचकर
वह सपने खरीदने लगा है ।
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युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
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किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
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नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...
punjivaad system me har koi ek dusre ka shoshan karta hai /
ReplyDeletebeautiful composition