अपनी सफलताओं , उपलब्धियों को
गिनना चाहता हूँ
कुछ नही
केवल शून्य पाता हूँ ।
निराश नही मैं
किंतु
ख़ुद को पराजित पाता हूँ मैं ।
रोज़ ख़ुद को देखता हूँ
आईने में
अपना चेहरा
बदला - बदला पाता हूँ मैं ।
अपनी पहचान खोने लगा हूँ मैं ।
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