कलतक चाँद पर
जो नानी दिखती थी
अब वह ..
और बूदी हो गयी है
नानी नहीं अब वह
परनानी हो गयी है
अब वह गरीब हो गयी है
इसीलिए ..
धरतीवालों को अपनी ज़मीन बेचने लगी है
पृथ्वी की आर्थिक मंदी से
चाँद वाली नानी भी प्रभावित है
किउन न हो
दोनों का रिश्ता जो है
आज नानी ज़मीन बेच रही है
कंही कल वह खुद को न बेच दे .
धरतीवालों का क्या भरोसा
कुछ भी खरीद बेच सकते हैं .
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
-
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
-
किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
-
हे गुरुवर मैं, एकलव्य की जाति का हूँ सूद्पुत्र हूँ कर्ण की तरह किन्तु ,मैं नही दे सकता अपना अंगूठा न ही बना सकता हूँ आपकी प्रतिमा पर ,...
No comments:
Post a Comment