Sunday, June 13, 2010

खाली कैनवास पर

खाली कैनवास पर
यह उदास चेहरा किसका है
वह एक आम भारतीय है
गरीबीरेखा के नीचे वाला.

उसके पास  खड़ी है
सूखे झुर्रियों गालोंवाली
अस्सी बरस की उसकी माँ
और एक जवान बहन.

काम नही मिला उसे
किसी रोज़गार गारंटी में
नेता जी आये थे  एकदिन
उस दीन के झोपडी में
एक रात बिताया था
उस दलित के कुटिया में
नेताजी के साथ उसकी
तस्वीर भी छपी थी
अगले दिन के अख़बारों में
नेताजी ने कहा था -
तुम्हारा वोट बहुमूल्य है
मुझे मत-दान  करना
न समझ था बेचारा
जाकर मतदां केंद्र
दान कर आया
अब उसके पास सिर्फ
अख़बारों के टुकड़े , और
मंत्री जी का वादा शेष है .

2 comments:

  1. सच को बड़े करीने से उकेरती रचना ...बहुत सुन्दर !!!

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  2. बहुत आभार आपका

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