Friday, January 13, 2012

गावं से अभी -अभी लौटा हूं शहर में


गावं से
अभी -अभी
लौटा हूं शहर में

याद आ रही है
गावं की शामें
सियार की हुक्का हू
टर्र -टर्र करते मेंढक
सुलटी*के नवजात पिल्ले

कुहासा में भीगी हुई सुबह
घाट की युवतियां
सब्जी का मोठ उठाया किसान
धान और पुआल
आँगन में मुर्गिओं की हलचल

डाब का पानी
खजूर का गुड़
अमरुद का पेड़
मासी की हाथ की गरम रोटियां
माछ-भात

पान चबाते दांत
और ...........
नन्ही पिटकुली* की
चुलबुली बांतें
-----------------------------
*१ हमारी कुतिया
*२ छोटे मामा की ५ वर्ष की बिटिया

2 comments:

  1. सचमुच गाँव की मिठास शहर में कहाँ है !
    बहुत सुन्दर रचना !
    मेरी नई पोस्ट पे आपका इन्तेजार है !

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