पतझड़ के मौसम में ,
तुम, बहुत याद आये
मैं शराबी हूँ, तुम्हे याद है ?
देखो लोग झूमते हैं पीकर
मैं झूमता हूँ
तुम्हे सोचकर ..
तुम, बहुत याद आये
मैं शराबी हूँ, तुम्हे याद है ?
देखो लोग झूमते हैं पीकर
मैं झूमता हूँ
तुम्हे सोचकर ..
की-बोर्ड पर चलती उंगलियाँ लगातर तोड़ रही हैं कमरे की नीरवता कुछ देर पहले तक बालकनी पर बिखरी पड़ी थी चांदनी अब अँधेरा है कुछ ही पल में दरवाजे...
मोहब्बत का नशा है...सर चढ कर बोलता है....
ReplyDeleteसही कहा आपने , शुक्रिया
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