बंदूक,
कुपोषण
दंगे ,आगजनी
नफ़रत
इन सबके बीच रहकर भी
तुम लिख लेते हो
प्रेम कविता ....?
सच में कमाल हो तुम ....
कुपोषण
दंगे ,आगजनी
नफ़रत
इन सबके बीच रहकर भी
तुम लिख लेते हो
प्रेम कविता ....?
सच में कमाल हो तुम ....
ज़ार मर गया मर गया हिटलर भी वो भी गया और ये भी जायेगा .. इक़लाब जारी रहेगा .. अमन के आने तक ऐ मेरी अधूरी कविता तुझे पूरा करूँगा इन्कलाब के ...
क्योकि इस सब मे अगर किसी की जरुरत है तो वो प्रेम ही तो है !!
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