Tuesday, June 13, 2017

गवाही कौन दें

हत्या
हर बार
तलवार या बंदूक से नहीं होती
हथियारों से जिस्म का खून होता है
भावनाओं का क़त्ल फ़रेब से किया जाता है 
और पशु फ़रेबी नहीं होता
जानता है यह हक़ीकत इन्सान
फिर भी नहीं शर्माता
शर्म के लिए भी विवेक चाहिए |
धरती ,
बोलती नहीं दर्द की कथा
आकाश रहता है ख़ामोश
जिस पेड़ को हमने छुआ था
याद है उसे स्पर्श का अहसास
पर, अब
हम नहीं हैं एक साथ
गवाही कौन दें
कि बेवफ़ा कौन है ?

1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व रक्तदान दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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