जब तक तुम जियोगे
दाने - दाने को तरसोगे
समझे किसान ?
तुम्हे क्या लगता है
अंग्रेज़ यहाँ से चले गए
वे अब भी मौजूद हैं
हमारी व्यवस्था में
क्या तुम्हें अहसास नही होता
उनके होने का
दलाल नेताओं के व्यवहार से ?
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किसान की करूँ गाथा ....यथाथ कविता
ReplyDeleteशुक्रिया baban jee
ReplyDeletekoi to hai jo kisan ki peeda ke bare me bhi sochta hai.
ReplyDeletegood!