खाली हाथ
वह लौट आया
मंदिर के दहलीज से
नही ले जा सका
धूप -बत्ती ,नारियल
तो ----
देवता नाराज़ थे
झोपड़ी में
बिलकते रहे
बच्चे भूख से
भगवान
एक भ्रम है
मान लिया उसने
की-बोर्ड पर चलती उंगलियाँ लगातर तोड़ रही हैं कमरे की नीरवता कुछ देर पहले तक बालकनी पर बिखरी पड़ी थी चांदनी अब अँधेरा है कुछ ही पल में दरवाजे...
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