Wednesday, February 29, 2012

लौटा पाओगे मुझे ..............


खो जाना चाहता हूं 
वसंत पवन में 
धूप में 
ज्योत्स्ना में 
पंछियों के मधुर सूर में .........
लौटा पाओगे  मुझे 
पृथ्वी का खोया हुआ यौवन ?

1 comment:

  1. आज की इस स्वार्थ भरी दुनिया में भाई-भाई का नहीं होता, लोग माँ-बाप के नहीं होते। उनसे क्या उम्मीदें की जाएँ जो अपनी माँ के नहीं हुए, वे धरती माँ के क्या होंगे!

    ReplyDelete

'भाग्य-विधाता' तस्वीर में मुस्कुरा रहे हैं

  बहुत अजीब सी ख़ामोशी है जबकि आतंक लगातार तांडव कर रहा है हमारे आसपास इसे भय कहा जाए या बेशर्मी ! मेरे कमरे से संविधान नामक पुस्तक गायब है ज...