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फिर उदास हो उठेगा मन
की-बोर्ड पर चलती उंगलियाँ लगातर तोड़ रही हैं कमरे की नीरवता कुछ देर पहले तक बालकनी पर बिखरी पड़ी थी चांदनी अब अँधेरा है कुछ ही पल में दरवाजे...
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. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...
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गाँधी ने पहनी नहीं कभी कोई टोपी फिर उनके नाम पर वे पहना रहे हैं टोपी छाप कर नोटों पर जता रहे अहसान जैसे आये थे बापू इस देश मे...
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किसी को नहीं दिखता जमीन के नीचे उबलते लावा का रंग अब पढ़ते हैं तस्वीर में मेरा चेहरा बढ़ी हुई दाढ़ी और .... कुछ नहीं मने मेरा कवि मर गया है ख...
तस्वीरें सत्य लेकर बोलने लगें तो तस्वीरों को मूल से खत्म कर देंगे
ReplyDeleteतस्वीरें बोलें भी तो क्या...कुछ कर तो नहीं सकेंगीं....
ReplyDeleteबेहतरीन !!
अनु
सही कहा आपने अनु जी .....
Deleteएकदम सत्य कहा आपने रश्मि जी ....
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