Thursday, June 18, 2015

तुम्हारी मीठी मुस्कान आज भी चिपकी हुई है मेरी आँखों पर

इनदिनों,
अपने खालीपन में
मैं अक्सर खोजता हूँ तुम्हें अपने आस-पास
और याद करता हूँ अतीत के सुहाने पलो को
तुम्हारी मीठी मुस्कान
आज भी चिपकी हुई है मेरी आँखों पर
हाँ , अब मेरी आँखें जरुर कमज़ोर हो चुकी है
इतना कमज़ोर कि 

अब मैं देख नहीं पाता हूँ साफ़ -साफ़
इन्द्रधनुष के रंगों को भी ||

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