Saturday, October 24, 2026

फिर उदास हो उठेगा मन

 की-बोर्ड पर चलती उंगलियाँ

लगातर तोड़ रही हैं कमरे की नीरवता
कुछ देर पहले तक बालकनी पर
बिखरी पड़ी थी चांदनी
अब अँधेरा है
कुछ ही पल में दरवाजे के सामने
सूरज मुस्कुराएगा
कबूतरों का झुंड उतर आएगा सामने वाली छत पर
दाना चुगने
मीठी धूप में बैठकर अख़बार पढ़कर
फिर उदास हो उठेगा मन

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फिर उदास हो उठेगा मन

  की-बोर्ड पर चलती उंगलियाँ लगातर तोड़ रही हैं कमरे की नीरवता कुछ देर पहले तक बालकनी पर बिखरी पड़ी थी चांदनी अब अँधेरा है कुछ ही पल में दरवाजे...