हर बार खोलता हूँ द्वार
कि , हो जाये तुम्हारा दीदार
काले मेघों का जमघट
हटा नही अभी
तुम भी बेचैन हो शायद
ओ चाँद ....
कि , हो जाये तुम्हारा दीदार
काले मेघों का जमघट
हटा नही अभी
तुम भी बेचैन हो शायद
ओ चाँद ....
. 1. मैं युद्ध का समर्थक नहीं हूं लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी और अन्याय के खिलाफ हो युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो जनांदोलन से...