Tuesday, November 8, 2011

वादे



सारे वादे तुम्हारे 
मैंने रख दिया है 
दिल की  किताब में 

सूख चुके हैं 
सभी वादे 
किताब की फूल की  तरह 
छूने से डरता हूं 
 टूट न जाये कहीं.........

Tuesday, November 1, 2011

गोबरधन असमय नही मरता

गोबरधन असमय नही मरता
यदि मिल जाता उसे
दो मुट्ठी चावल

गोबरधन के बच्चे
सीख जाते
 लिखना अपना नाम
यदि मिल जाता उन्हें
दाखिला किसी सरकारी स्कूल में

नही लगाती फांसी गोबरधन की बीवी
यदि आ जाती पुलिस
उसकी इज्ज़त जाने  से पहले

यह अच्छा हुआ कि
गोबरधन नही जनता था
अपने अधिकारों के बारे में
दहल जाता उसका दिल
यदि  एक बार पढ लेता
वह भारतीय संविधान
मरने से पहले ........................

Sunday, October 23, 2011

दरारें


दरारें बहुत घातक होती है
चाहे कहीं हो
दीवार में
या रिश्तों में
बालू -सीमेंट भर सकती हैं
दीवार की दरारें
किन्तु -
रिश्तों की दरारें
नही भरती किसी भी सीमेंट से
बचा के रखिये
रिश्तों को --
हर दरार से ...........

Thursday, September 1, 2011

खंडहर

शहर के बीचों -बीच
तन्हा खड़े 
खंडहर की दीवारों पर 
खुदे हुए हजारों नामों के बीच
मैंने कभी नहीं खोजा 
अपना नाम 
यूं  भी कभी
हिम्मत नहीं कर पाया , कि
पत्थरों पर लिखुँ 
मैं अपना नाम 
जब लिख नहीं पाया
कभी किसी दिल पर /

पत्थर तो  सह लेगा 
हर दर्द को 
दिल कहाँ सह पायेगा
नुकीले चुभन की पीड़ा ?
बेजुबान खंडहर की दीवारें 
चीखेगी नहीं कभी 
किन्तु अहसास है मुझे 
चुभन की पीड़ा की /

मेरे भी दिल पर कभी
लिखा था किसी ने 
अपना नाम 
एक लम्बी रेखा खींच कर 
आज कह नहीं सकता यकीन से 
कि -उसे याद है 
उनका  नाम मेरे दिल पर खुदा हुआ 
किन्तु-
बहते लहू धारा का  निशां
आज भी बाकी है
मेरे दिल पर //

Friday, August 26, 2011

मेरी बातें ....


बस तुम से 
तुम तक 
रहे मेरी बातें
जब कभी तुम्हें याद आये 
वो चांदनी रातें 
ठीक मेरी तरह 
हमेशा सुरक्षा का एक घेरा चाहती हैं 
मेरी बातें ....

Sunday, August 14, 2011

आज़ादी की ६५वीं वर्षगांठ की मुबारक बात


सोम से शुक्रवार तक 
जो चिपके रहते थे कम्पुटर से 
सजाते थे आंकड़े 
अमेरिका के लिए 
आज आंकड़ो का अमेरिका 
धरासाई है 
और वे खोज रहे हैं नई नौकरियां 
और --
उधर दिल्ली के 
लालकिले पर चड़कर
भारत के भाग्य विधाता 
दे रहे हैं भाषण ---
राष्ट्र मंडल खेल से लेकर 
मुंबई आदर्श कांड तक 
इस पारी की 
उपलब्धियां है 
और जो मारे गए हैं 
फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में 
रेल दुर्घटना में 
मुंबई ब्लास्ट में 
कर्ज के बोझ से 
बाढ में 
भूख मरी से 
उन सबको दे रहे हैं 
मुबारक बात  
आज़ादी की ६५वीं वर्षगांठ की //
-- 


Wednesday, August 10, 2011

मैं आलिंगन करूँगा तुम्हारा


तुम्हारे वादों पर 
भरोसा नही 
खुद को खोज रहा हूं भीतर 
हो गया अहसास जिस दिन 
 मेरे होने का 
मेरे दोस्त 
मैं आलिंगन करूँगा तुम्हारा .

युद्ध की पीड़ा उनसे पूछो ....

. 1.   मैं युद्ध का  समर्थक नहीं हूं  लेकिन युद्ध कहीं हो तो भुखमरी  और अन्याय के खिलाफ हो  युद्ध हो तो हथियारों का प्रयोग न हो  जनांदोलन से...