Thursday, July 9, 2020

अंधकार का साम्राज्य विस्तार ले रहा है

रात की लम्बाई बढ़ गयी है
या सुबह देर से आने लगी है
इनदिनों
या अंधेरा और सन्नाटे ने
अड्डा जमा लिया है भीतर !
चारों ओर हाहाकार
चीत्कार
बदबूदार हवा
लावारिस शवों के बीच
चली रही है सांसे
देह के साथ
सोच भी संक्रमित हो रही है
भरोसा भी अब धोखा देने लगा है
रात की उम्र बढ़ गयी है
अंधकार का साम्राज्य विस्तार ले रहा है
भीतर ही भीतर !

4 comments:

  1. सटीक और सामयिक प्रस्तुति

    ReplyDelete
  2. रात की उम्र बढ़ गयी है
    अंधकार का साम्राज्य विस्तार ले रहा है
    भीतर ही भीतर !
    बहुत खूब,गहरी संवेदना ,सादर नमन आपको

    ReplyDelete

इन्सान नमक हराम होता है!

  नमक तो नमक ही है नमक सागर में भी है और इंसानी देह में भी लेकिन, इंसानी देह और समंदर के नमक में फ़र्क होता है! और मैंने तुम्हारी देह का नमक...